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निर्मल मन फाउण्डेशन दर्शन यात्रा-2026

 निर्मल मन फाउण्डेशन दर्शन यात्रा-2026

श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध मंदिरों में किए दर्शन, ऐतिहासिक स्थलों को देख हुए अभिभूत


जयपुर। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निर्मल मन फाउण्डेशन द्वारा आयोजित दर्शन यात्रा-2026 श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और राजस्थान के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन के साथ-साथ राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और स्थापत्य कला का भी अवलोकन किया।


यात्रा का शुभारम्भ शनिवार, 20 जून 2026 की रात्रि 10 बजे वाटिका, जयपुर से हुआ। यात्रा प्रारम्भ होने से पूर्व सभी श्रद्धालुओं ने भगवान का स्मरण कर मंगलमय यात्रा की कामना की। बस में भजन-कीर्तन, धार्मिक चर्चा एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालु अपने पहले पड़ाव की ओर रवाना हुए।

चारभूजा धाम में प्राप्त हुई आध्यात्मिक शांति

यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव मेवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध तीर्थस्थल चारभूजा धाम रहा। यहां भगवान विष्णु के चारभुजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर की भव्यता और धार्मिक वातावरण ने सभी का मन मोह लिया। प्रातःकालीन आरती में सम्मिलित होकर श्रद्धालुओं ने अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।मंदिर परिसर में दर्शन के पश्चात श्रद्धालुओं ने धार्मिक कथाओं एवं मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की। अनेक श्रद्धालुओं ने कहा कि चारभूजा धाम के दर्शन उनके जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में शामिल हो गए हैं।


लक्ष्मण झूला और प्राकृतिक सौंदर्य ने किया आकर्षित

चारभूजा धाम के बाद यात्रा लक्ष्मण झूला क्षेत्र की ओर बढ़ी। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतीय वातावरण और शांत परिवेश ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालुओं ने प्रकृति के बीच समय बिताया और ईश्वर की सृष्टि की अद्भुत सुंदरता का अनुभव किया। यात्रा में शामिल बच्चों और युवाओं ने यहां विशेष उत्साह दिखाया। सभी ने स्मृति के रूप में अनेक तस्वीरें लीं और अपने अनुभव साझा किए।

श्री रूपनारायण जी के दर्शन से हुआ मन प्रफुल्लित

यात्रा के अगले चरण में श्रद्धालु श्री रूपनारायण जी मंदिर पहुंचे। मंदिर में भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर में आयोजित पूजा-अर्चना में सभी ने भाग लिया। मंदिर के पुजारियों द्वारा श्रद्धालुओं को मंदिर की परम्पराओं और धार्मिक महत्व की जानकारी दी गई। भक्तिमय वातावरण में सभी श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए।

नाथद्वारा में श्रीनाथजी के दर्शन बने यात्रा का विशेष आकर्षण

दर्शन यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर रहा। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। भगवान श्रीनाथजी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मंदिर पहुंचे। मंदिर में भगवान के दिव्य स्वरूप, भव्य श्रृंगार और अलौकिक वातावरण ने सभी का मन मोह लिया। दर्शन के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। मंदिर परिसर में "जय श्रीनाथ" के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने बताया कि श्रीनाथजी के दर्शन उनके जीवन के सबसे सुखद और पवित्र अनुभवों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन से उन्हें आत्मिक शांति और नई ऊर्जा प्राप्त हुई।


251 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा के दर्शन

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने 251 फीट ऊंची भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के दर्शन भी किए। प्रतिमा की भव्यता और विशालता को देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के समक्ष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की। विशाल प्रतिमा के आसपास का वातावरण अत्यंत आकर्षक और आध्यात्मिक था। श्रद्धालुओं ने यहां लंबे समय तक रुककर दर्शन किए और स्मृति चित्र भी लिए।

उदयपुर भ्रमण ने छोड़ी अमिट छाप

धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद यात्रा दल उदयपुर पहुंचा। झीलों की नगरी उदयपुर की सुंदरता देखकर सभी श्रद्धालु अभिभूत हो गए। शहर की स्वच्छता, ऐतिहासिक धरोहरें और प्राकृतिक सौंदर्य ने सभी का मन मोह लिया।


फतेहसागर झील पर हुआ भव्य भंडारा

उदयपुर भ्रमण के दौरान प्रसिद्ध फतेहसागर झील की पाल पर भव्य भोजन भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। सामूहिक भोजन ने सभी में भाईचारे और एकता की भावना को और मजबूत किया। झील का मनोहारी दृश्य, ठंडी हवाएं और धार्मिक वातावरण ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया। सभी श्रद्धालुओं ने संस्था द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।

सहेलियों की बाड़ी और सुखाड़िया सर्किल का किया भ्रमण

उदयपुर में श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध सहेलियों की बाड़ी का भ्रमण किया। यहां की ऐतिहासिक संरचनाएं, सुंदर उद्यान और फव्वारे सभी को आकर्षित कर रहे थे। इसके बाद श्रद्धालु सुखाड़िया सर्किल पहुंचे जहां उन्होंने स्थानीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों का आनंद लिया।


हॉरर हाउस और भूलभुलैया ने बढ़ाया रोमांच

यात्रा में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने हॉरर हाउस और भूलभुलैया का भ्रमण किया। यहां बच्चों और युवाओं ने विशेष आनंद लिया।

रोमांचक अनुभवों ने यात्रा को और अधिक रोचक बना दिया। सभी प्रतिभागियों ने इन गतिविधियों का भरपूर आनंद उठाया।

सांवरिया सेठ के दरबार में हुए नतमस्तक

उदयपुर भ्रमण के पश्चात यात्रा दल प्रसिद्ध सांवरिया सेठ मंदिर के लिए रवाना हुआ। प्रातःकाल सभी श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और मंगल आरती में भाग लिया। मंदिर में भगवान के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। सांवरिया सेठ के दरबार में भक्तों की आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए प्रार्थना की। मंगल आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिरस में डूबा हुआ था। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।

चित्तौड़गढ़ किले ने कराया इतिहास का साक्षात्कार

सांवरिया सेठ के दर्शन के पश्चात यात्रा दल चित्तौड़गढ़ के लिए रवाना हुआ। यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भारत के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक चित्तौड़गढ़ किले का भ्रमण किया। किले की विशालता, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व को देखकर सभी श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने महसूस किया कि यह केवल एक किला नहीं बल्कि वीरता, बलिदान और स्वाभिमान की अमर गाथा है।

विजय स्तंभ और पद्मिनी महल ने किया प्रभावित

किले के भीतर स्थित विजय स्तंभ को देखकर श्रद्धालु उसकी अद्भुत वास्तुकला की प्रशंसा करते नहीं थके। इसके बाद उन्होंने पद्मिनी महल का भ्रमण किया और रानी पद्मिनी के त्याग एवं साहस की कहानी को जाना। श्रद्धालुओं ने कहा कि इतिहास की इन अमूल्य धरोहरों को देखकर उन्हें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व महसूस हुआ।

जौहर स्थल देखकर हुए भावुक

चित्तौड़गढ़ भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने जौहर स्थल भी देखा। यहां पहुंचकर सभी ने उन वीरांगनाओं के बलिदान को नमन किया जिन्होंने स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। कई श्रद्धालु इस ऐतिहासिक स्थल को देखकर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान हमें अपने इतिहास और संस्कारों की याद दिलाते हैं।



श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे कार्यकर्ता

पूरी यात्रा के दौरान संस्था के कार्यकर्ता रोशन झा एवं कविता झा ने श्रद्धालुओं की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यात्रा की व्यवस्थाओं, भोजन, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा। श्रद्धालुओं ने दोनों कार्यकर्ताओं के समर्पण, सेवा भावना और सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सभी ने कहा कि उनकी मेहनत के कारण यात्रा अत्यंत सुचारु एवं सफल रही।

संस्था अध्यक्ष कैलाश ओझा ने कहा

इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष कैलाश ओझा ने कहा कि निर्मल मन फाउण्डेशन का उद्देश्य केवल धार्मिक यात्राओं का आयोजन करना नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिकता, संस्कार और पारस्परिक प्रेम को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राएं लोगों को मानसिक शांति प्रदान करती हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं। भविष्य में भी संस्था इसी प्रकार के जनहितकारी एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी।

संस्था उपाध्यक्ष राहुल सैनी ने कहा

संस्था सचिव कविता झा ने कहा

संस्था की सचिव कविता झा ने कहा कि यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं ने एक परिवार की तरह सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा कि सेवा, सहयोग और समर्पण की भावना ही संस्था की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सहभागिता का आह्वान किया।


सफल रही दर्शन यात्रा

यात्रा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने निर्मल मन फाउण्डेशन के प्रति आभार व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें आध्यात्मिक शांति, सांस्कृतिक ज्ञान और ऐतिहासिक चेतना प्रदान की है। यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभव जीवनभर उनकी स्मृतियों में बने रहेंगे।



निर्मल मन फाउण्डेशन की यह दर्शन यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का भी माध्यम सिद्ध हुई। श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, प्रसन्नता और भक्ति की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। सभी ने भविष्य में भी ऐसी यात्राओं के आयोजन की कामना की और संस्था के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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